आप कौन हैं? क्या हैं?

हम रोज आईने में अपना चेहरा देखते हैं, अपने आप को देखते हैं कि हमारा चेहरा कैसा लग रहा है, पर क्या हम कभी अपने आप को दर्पण में देख के यह पूछते है हम कौन है? क्या ये प्रश्न को कभी भी अपने मन से पूछा है, अपने को पहचानने की कोशिश की है? चेहरे से पहचानना और बात है, और अपने आप को जानना और बात है.!

वास्तव मे जिस समय आप अपने को जान लेते हो, उस समय आप सही अर्थो मे आप हो जाओगे ! यह एक सत्य है कि जब तक आदमी अपने घेरे से बाहर निकल कर एक निष्पक्ष व्यक्ति के रूप मे अपने आपका तटस्थ भाव से निरिक्षण करता है, तो वह अपने आप को पहचान लेते है! तब उसकी अन्तरात्मा मे सोये तमाम गुण अपने आप जग उठते हैँ, तब उसकी सम्पूर्ण आत्मिक शक्तिया जाग उठती हैँ ! जब किसी व्यक्ति की तमाम आत्मिक शक्तियां जाग उठती है, तब वह वास्तव मे महान बन जाता है. ! वह हमेशा प्रगति की और ही आगे बढ़ेगा ! उसकी आशा का जागरण होता है, प्रत्येक इंसान के अंदर चाहे वह स्त्री हो या पुरुष एक और मन रहता है, आप इसे महसूस कर सकते हैं, इसे अवचेतन मन कहते हैं ! यही हमेशा बताता है कि आप सही हैं या गलत इसी मन से खुद को देखिये आप अपने आप को देख पाएंगे कि आप कौन हैं? और क्या हैं??

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अपनी कमजोरियों को जाने…

आप जब तक अपनी कमजोरिया दूर नही करेंगे, तब तक वो आपकी पीछा करेंगी।वास्तव में कमजोरी क्या है? कमजोरी हमारी अंतर्मन की दुर्बलता के कारण उत्पन्न होती है। जब हमारा अंतर्मन अर्थात इन्द्रियों पर वश नही रह जाता तो हम अपने कमजोरियों के गुलाम बन जातें हैं। ऐसे अनेक उदाहरण है जैसे- नशा, चोरी, ठगी इत्यादि।इनसे छुटकारा पाने का एक मात्र उपाय है , अपने मन को अपने वश में रखना, इससे कमजोरी अपने आप दूर हो जायेगी। आपने बुरा काम किया है उस पर कभी पश्चयताप मत करिये , पछताने से कोई लाभ नही होने वाला है, पछतावे के बदले ये सोचिये की फिर कभी आप ये गलती न करे।

भूल तो सभी से होता है परन्तु पछतावे के जगह भूल कभी न दोहराने की संकल्प करे। हमेशा आप जब कमजोरी को नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे तो आपको बहुत सारे विकल्प मिलेंगे, अपने कमजोरी को जाने, सोचें और उनसे लड़े।

एक बार फिर से मुस्कुरा दो…

चलो उठो न हारो, खुद से पोंछ लो इन आशुओं को ,एक बार फिर से मुस्कुरा दो….

बनाओ नए इरादे,फिर से कुछ करने की फरियादें, कुछ करने की चाहत, नए सपनो की आहट , चलो एक बार फिर से मुस्कुरा दो…..

अभी दूर तक जाना है , न हारो न घबराओ न हिम्मत को हारो, एक बार फिर से मुस्कुरा दो….

इतनी सी है आशा पर विश्वास नयी है , फिर से कोशिश करो अब आश नयी है, मंजिल तक अपने कदम तो बढ़ा दो, चलो एक बार फिर से मुस्कुरा दो।

डर से लड़ना सीखें

डर क्या है ? एक अंजान परिस्थिति ही तो है ! डर हमें उस चीज से लगता हैं जिससे हमारा सामना नहीं हुआ रहता और जब आप अपने डर से मिलते है तो आपको एह्सास होता है कि डर तो उतना भी डरावना नहीं जितना आप सोचा करते थे !हम जितना डर से बचते हैं हमारा डर उतना ही बड़ा होता रहता है ।

डर के बारे में अपने आप से जरुर बात करना चहिये , इससे डर को काबू करने का मौका मिलेगा।

इसलिये डर से आँख मिलाये अगली बार जब डर आप से मिलेगा तो बहूत कमजोर होकर मिलेगा और डर भी आपसे डर के good bay बोल देगा। इसलिये डर से लड़ना सीखे । ।

खुद पर प्यार बेशुमार आया

मैंने आईने में खुद को देखा तो ,ख्याल आया , खुद पर खुद से ही ऐतबार आया ,

खुद पर भरोसा तो कर , तुझे अभी मंजिल पाना हैं , यूं न भटक, ये पैगाम आया ,

मैंने खुद को आईने में देखा तो ये ख्याल आया ,

तू खुद की कर इरादे बुलंद इतने की तेरे आगे थक कर चूर हो जाये तेरे बुरे वक्त , ये सवाल बार बार आया ‘ , चलना है अभी कठीन रास्ते , पहुँचना है अभी मुझे मंजिल तक , ये सोच कर करार आया, मैंने खुद को आइने में देखा तो ये ख्याल आया ,

सुख दुख तो रास्ते के सफर हैं, उनके साथ ही सबको करना गूजर है , मेरे उम्मीदों को नया जान आया , मुझे खुद पर आज प्यार आया , वो भी बेशुमार आया ,

मेरे हौसलों और ज़ज़्बों में निखार आया , मैंने खुद को आइने में देखा तो ख्याल आया , खुद पर प्यार बेशुमार आया !!!

हिम्मत …

हमारे हिम्मत न कर पाने का कारण यह नहीं है, कि कुछ कर पाना कठिन है।
बल्कि कुछ कर पाना कठिन इसलिए है कि हम हिम्मत ही नहीं करते। हिम्मत करके आगे बढ़ने से कई सारे मुश्किलें आसान हो जाती है कुछ समस्याएं बस हिम्मत करने भर से ही हल हो जाती है ¦ जिंदगी में एक पल ऐसा आता है की हमारा मन और दिमाग कहता है की बस हो गया मत करो ये काम तुम नहीं कर सकते ;आचानक से दिल से एक आवज निकलती है हिम्मत करके एक बार कोशिश तो करो बस उसी समय से हमारी सारी मुश्किलें आसान हो जाती हें

इसलिये हिम्मत तो करो मुश्किलें खुद बखुद आसान हो जायेगीं !!!

उम्मीद

क्या आप जानते हैं सब कुछ खो देने से बुरा क्या होता है ?

उस उम्मीद खो देना जिसके दम पर हम सब कुछ दुबरा हासिल कर सकते हैं।

इसलिए ज़िन्दगी के किसी भी परीक्षा में आशा नही खोना चाहिए क्योंकि हर परीक्षा का फल आता है । इसलिए ज़िन्दगी में कभी उम्मीद नही हारनी चाहिए क्या पता इस बार के परीक्षा में आप अव्वल आये।

ज़िन्दगी अक्सर ख्वाइशें से भरी होनी चाहिए अक्सर उम्मीदें कुछ बेहतर करने की चाह देती है।

कठिन परिश्रम

शब्दकोष ही एक ऐसी जगह है जहाँ ‘सक्सेस ’ ‘वर्क ’ से पहले आता है .कठिन परिश्रम वो कीमत है जो हमें सफलता के लिए चुकानी पड़ती है . मुझे लगता है कि यदि आप कीमत चुकाने को तैयार हों तो आप कुछ भी पा सकते हैं !!

नजरिया

आपकी जिन्दगी इस से निश्चित नहीं होती कि जिन्दगी आपके लिए क्या लेकर आती है

जबकि ये निर्भर करता है आपके रवैये पर जो आप जिन्दगी के लिए रखते है |

सो यह निर्भर करता है आप किस नजरिये से चीजों को देखते है !

फिर जैसी आपकी नज़रिया होगी उस हिसाब से वो चीज़ आपको खूबसूरत या बदसूरत दिखेगी,

इसलिए नजरिया बदलों चीज़े अपने आप बदल जायेगी ये इस बात पर निर्भर करती है की आप की नज़रिया कैसी है ,सकारात्मक या नकारात्मक।