माफ करना

कोई भी बुराई कर सकता है, निन्दा कर सकता है, शिकायत कर सकता है, पर समझने और माफ करने के लिए किसी को समझदार और संयमी होना पड़ता है,

 लोगो की आलोचना करने के बजाय हमें उन्हें समझने की कोशिश करना चाहिए की कोई अगर आपके प्रति नाराज है या आलोचक है तो वो किस कारण से ऐसा कर रहा है;

किसी को गलत ठहराने से ज्यादा बेहतर है की आप उस नजरिये को सोचो, इससे आपके अन्दर सहानभूति , सहनसक्ति और दयलुता जैसी भावनाये आएँगी , सबको समझने का मतलब है सबको माफ़ करना।

डॉ जॉनसन ने कहा था क़ि  ” भगवान खुद आदमी का मौत से पहले उसका फैसला नही करता ”                                              तो हम और आप ऐसा करने वाले कौन हैं??

माफ़ करना सीखो।।


बदलाव

बदलाव किसी भी समय लाया जा सकता है, चाहे हमारी उम्र कुछ भी हो,या आदतें कितनी भी पुरानी हो, अगर हमे मालूम है कि हमे क्या बदलने की जरूरत है तो हम किसी भी समय वक्त और अपनी ज़रुरत के हिसाब से अपने में बदलाव ला सकते हैं।

हमारा निर्माण आदतें करती हैं, ऐसा होना अच्छी बात है, क्योंकि अगर हमे हमेशा कुछ करने से पहले सोचना पड़े तो हम कोई भी काम ठीक से नही कर पाएंगे,  वैसे बदलाव  करने में कोई देर नही होती, हर अच्छा या बुरा तजरबा कुछ न कुछ फर्क पैदा करता है।

नए नए बदलने में , चाहें ख्याल या आदत या खुद की सख्सियत हो कुछ तो समय लगता है,मगर वक्त के साथ खुद में एक बार बदलाव हो जाए तो बदलाव जीवन को नए मायने देती हैं,  क्योंकि वक्त भी यही कहता है  कि  खुद को वक्त के हिसाब से बदल लो तो ज़िन्दगी आसान और खूबसूरत हो जायेगी।

Internal motivation

    आत्मसम्मान, जिमेदारी और विश्वास और सकारात्मकता व्यक्ति के आंतरिक प्रेरणाएँ होती हैं,

    आन्तरिक प्रेरणा का संबध जीत या हार से नही होता, बल्कि यह किसी काम को ईमानदारी से करने में सही निर्णय लेने से महसूस होता है।

    बचपन में जब फ़िल्म देखते थे तो कभी कभी एक सिन दिखाई पड़ता था की , एक इंसान के जैसा दो और निकल कर आते थे, एक काले कपड़े में होता और दूसरा सफेद कपडे में, दोनों अलग अलग बाते करते , में सोचती थी काला वाला भुत है और सफेद वाला परी के पास से आया होगा,पर अब जा के मतलब समझ आया,

       वास्तव में वो तो हमारी आत्मा की आवाज़ होती है, जब हम किसी कार्य को करते हुए परिस्थितियों के भँवर में फस जाते हैं तो हम अपने दिल से,आत्मा से पूछते है की क्या करे ?? और दो बातें जेहन में चलती है,

    तब हम अपनी आन्तरिक प्रेरणा से निर्णय लेते हैं,

    किसी काम के लिए सही आंतरिक प्रेरणा खुद से खुद के लिए बहुत बड़ा पुरस्कार है।

    परस्थिति समझ न आये तो …

    पानी को कसकर पकड़ोगे तो वो हाथ से छुट जायेगा,
    उसे बहेने दो वो अपना रास्ता खुद बना लेगा,
    कभी कभी जब परिस्थितिया समज में ना आये तो,
    जो कुछ जीवन में घटित हो रहा है उसे शांत भाव व
    तटस्थ होकर बस देखना चाहिए,
    समय आने पर जीवन अपना मार्ग खुद बना लेगा !!

    Conditioning

    किसी चीज का आदी बन जाना एक psychological process है।  हमारे अधिकतर व्यहार ,चीजो या माहौल या लगातार कुछ चीजो के अभ्यस्त रहना आदी  बनते रहते हैं। इसलिये हमे खुद को अच्छी चीजों का आदी बनाना चाहिये।

    यादि हम कोई सही चीज सही ढ़ंग से करना चाहें तो वास्तव में उसे सही ढ़ंग से नही कर पाएंगे,इसका  मतलब यह हुआ की हमे उसकी आदत बनानी पड़ेगी।

    आदत एक बहुत ही मुश्किल शब्द है, इसका छोड़ना और भी मुश्किल है, एक बार सही और गलत चीज़ की आदत पड़ जाता है तो उसका छुटकारा बहुत ही मुश्किल है, इसलिये अपने आप में अच्छी आदतें डालना बहुत जरूरी है,

    अच्छी आदतों को अपनाना मुश्किल है, लेकिन उनके साथ जीना आसान है, बुरी आदतों को अपनाना आसान है मगर उनके साथ जीना मुश्किल है।

    whi to khushi thi..

    Khuli khidki se aasman ko nihara ambar nila tha,pili si thi roshni,   sabkuch wahi tha Jo kal tha badla tha kuchh to WO chehre ki noor thi,   kuchh alag se Jo chamak rahi thi WO thi aankho ki roshni,

     Sab kuch wahi tha wahi dharti wahi aasmaa, wahi pilli roshni, par kuchh badla tha to WO pal tha, sayd usme ek kal tha,          

    Ek pal ne dheere se aake mere kano me ek baat khi thi, us pal ke sath dher sari umange Judi thi, jisne badal diya tha ek hi pal me sabkuch, lagne LGA tha nya har kuchh who to khushi thi,are whi to khushi thi Jo mere adhro pe fashi thi……

    zindgi ibadat hai!

    जरुरी नहीं की सजदे हो हर वक्त,
    और उसमे खुदा का नाम आये,
    जिन्दगी तो खुद ही एक इबादत है,
    शर्त ये है की ये किसीके काम आये !!

    Think positive live positive…

    Insaan man se jitatta hai aur man se hi harta hai, yani jivan ki disha hamari soch hi tay karti hai isliye soch sakaratmak honi chahiye,

    Aap ki soch aapki dristikon possetive  hai to aapke zindgi me sabkuchh possetive hoga,  aap ki soch aapki niji zindgi, family ,work par bhi asar karti hai, insaan chhota hai ya bda us ka kam chhota hai ya bda usaki soch use rasta dikhati hai,

    Possetive thinking aap ki mansikta ko badal sakti hai, samved me bhi kha gya hai ki Maine man ko jeet liya ,to Maine hriday ko jeet liya,                                                                                  manojyti hridyamjayti!! 

    So think possetive, live possetive..

    Ek kosis apne Sapno ke liye…..

    Sapne WO hoti hain, Jo ikchha deti hain,    kuchh karne ki ikchha aage badhne ki ikchha, kuchh karne ki ikchha ek chahat hai, chahaten kamjor ho sakti hain, par chahton me majbooti tab aati hai jab ham sapne dekhte hain, 

     Sapne Hume disha deti hain,nishchay deti hai, sapne hona bahut zaroori hai, agar sapne na ho to zindgi kuchh bhi nhi, aankho mai sapne aur kuchh karne ki ikchha zaroor hone chahiye,

    Mera manna hai ki sapne Hume  takat deti hai manzil take pahuchne me, zindgi ke maksad paane me sath deti hai,                           to sapne zaroor dekhiye aur ek kosis zaroor kariye  apne sapno ke liye,…

    maine ek khwab tha dekha..

    Mene kal ek khwab tha dekha,                              aankho mai taren chand tha dekha,               apna ek pehchan tha dekha,                                 ha mene kal rat ek khwab tha dekha,      

              ek khubsoort sa paigam tha dekha,                  ek apna bhi alag nam tha dekha,                   ek khubsoort andaz v dekha,                               mene ek khwab tha dekha,                 

    Dil mai ek aashu tha dekha,                                  manjil bahut pas se dekha,                                  pyara sa ahsas tha  dekha,                                   aankhon mai taren chand tha dekha,               mene kal ek khwab tha dekha..