खुशी

दुनीया में हर आदमी ख़ुशी की तलाश में हैं_ और इसे हासिल करने का एक ही रास्ता है अपने विचारों को नियन्त्रित करके  ख़ुशी हासिल करना। ख़ुशी हमारी बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नही करती, यह तो हमारे अंदरुनी परिस्थितियों  पर  निर्भर करती है।

सुख या दुःख का इस बात से कोई संबध नहीं है कि आपके पास कितना है या आप क्या है या आप कहाँ हैं या आप क्या कर रहें हैं। इसका संबध तो इस बात से है कि  आप इस बारे में क्या सोचते हैं , आप क्या सोंचकर खुश होते हैं जिससे आपको ख़ुशी मिलती है।

ख़ुशी का नाम सुनते ही चेहरे पर रौनक आ जाती है।।          हर बात में ख़ुशी है, अंतर केवल हमारे सोचने और समझने का है , यदि हम प्रयास करें तो अपने चारो ओर बिखरी खुशियों को इकठ्ठा कर सकतें हैं।।                                 प्रसन्न चेहरा , अच्छा आचरण और नर्म लहजे में बतचीत ऐसे गुण है की जिन्हें हर कोई पसंद करता है और दूसरो से इसकी आशा रखता है।इसलिये हमेशा खुश रहे ।।।

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I am overwhelmed to share this!!                  

I started blogging in the back 4 months , I simply didn’t. Hope for the number of followers to increase me a short time..

Thank you all my followers and reders.           Love you all…….

मेरी प्यारी नानी

  मै आज की ये रचना अपनी नानी को  dedicate करती हूँ

नानी वो शब्द है जिसे सुनकर  हमारे आँखों में चमक आ जाती है और मन बचपन के यादो में कही खो जाता है,      नानी जिसे हर चीज का तज़ुर्बा  दुगुना होता है क्योंकि वो हमारे माँ की भी माँ होती हैं, वो हर बात में कठोर नही होती थीं , वो हमारे शैतानियों को भी अक्सर छुपा जाती थीं,      इसलिए तो वो बचपन से अबतक हमारे लिए अत्यधिक प्यारी थीं।

मेरी नानी जिनका कल स्वर्गवास हो गया, वह बहुत नेक दिल और दिल की साफ़ महिला थी, बहुत बड़ा दिल था उनका,   हमने अपने दादी को कभी नही देखा क्योंकि बहुत पहले ही उनका स्वर्गवास हो गया था, पर अपने नानी से जो प्यार पाया वो बहुमुल्य हैं।

मेरी नानी की छवि एक ऐसी छवि थी जो नेतृत्व और ज्ञान से परिपूर्ण थीं, मुझे उनकी बातें बहुत लुभाती थीं, हालाँकि वे ज्यादा पढ़ी लिखी नही थीं पर उनमें ज्ञान अथाह था, वो सही मर्गदर्शक थीं, प्यार की सच्ची मूरत थीं,

हम सभी बहनें अपनी बचपन की सारी छुटियाँ  नानी के घर बितातें थे और नानी के किस्से और प्यार के साथ पता नही वो दो महीने गर्मियों के कैसे गुजर जातें थे,

बचपन दादी नानी के किस्से कहानियों के बिना पूर्ण नही होता है क्योंकि ज़िन्दगी का वो सफ़र बुजुर्गों के आशीर्वाद और उनके और प्यार के बिना अधूरा है।

Miss you naani…

माफ करना

कोई भी बुराई कर सकता है, निन्दा कर सकता है, शिकायत कर सकता है, पर समझने और माफ करने के लिए किसी को समझदार और संयमी होना पड़ता है,

 लोगो की आलोचना करने के बजाय हमें उन्हें समझने की कोशिश करना चाहिए की कोई अगर आपके प्रति नाराज है या आलोचक है तो वो किस कारण से ऐसा कर रहा है;

किसी को गलत ठहराने से ज्यादा बेहतर है की आप उस नजरिये को सोचो, इससे आपके अन्दर सहानभूति , सहनसक्ति और दयलुता जैसी भावनाये आएँगी , सबको समझने का मतलब है सबको माफ़ करना।

डॉ जॉनसन ने कहा था क़ि  ” भगवान खुद आदमी का मौत से पहले उसका फैसला नही करता ”                                              तो हम और आप ऐसा करने वाले कौन हैं??

माफ़ करना सीखो।।


बदलाव

बदलाव किसी भी समय लाया जा सकता है, चाहे हमारी उम्र कुछ भी हो,या आदतें कितनी भी पुरानी हो, अगर हमे मालूम है कि हमे क्या बदलने की जरूरत है तो हम किसी भी समय वक्त और अपनी ज़रुरत के हिसाब से अपने में बदलाव ला सकते हैं।

हमारा निर्माण आदतें करती हैं, ऐसा होना अच्छी बात है, क्योंकि अगर हमे हमेशा कुछ करने से पहले सोचना पड़े तो हम कोई भी काम ठीक से नही कर पाएंगे,  वैसे बदलाव  करने में कोई देर नही होती, हर अच्छा या बुरा तजरबा कुछ न कुछ फर्क पैदा करता है।

नए नए बदलने में , चाहें ख्याल या आदत या खुद की सख्सियत हो कुछ तो समय लगता है,मगर वक्त के साथ खुद में एक बार बदलाव हो जाए तो बदलाव जीवन को नए मायने देती हैं,  क्योंकि वक्त भी यही कहता है  कि  खुद को वक्त के हिसाब से बदल लो तो ज़िन्दगी आसान और खूबसूरत हो जायेगी।

Internal motivation

    आत्मसम्मान, जिमेदारी और विश्वास और सकारात्मकता व्यक्ति के आंतरिक प्रेरणाएँ होती हैं,

    आन्तरिक प्रेरणा का संबध जीत या हार से नही होता, बल्कि यह किसी काम को ईमानदारी से करने में सही निर्णय लेने से महसूस होता है।

    बचपन में जब फ़िल्म देखते थे तो कभी कभी एक सिन दिखाई पड़ता था की , एक इंसान के जैसा दो और निकल कर आते थे, एक काले कपड़े में होता और दूसरा सफेद कपडे में, दोनों अलग अलग बाते करते , में सोचती थी काला वाला भुत है और सफेद वाला परी के पास से आया होगा,पर अब जा के मतलब समझ आया,

       वास्तव में वो तो हमारी आत्मा की आवाज़ होती है, जब हम किसी कार्य को करते हुए परिस्थितियों के भँवर में फस जाते हैं तो हम अपने दिल से,आत्मा से पूछते है की क्या करे ?? और दो बातें जेहन में चलती है,

    तब हम अपनी आन्तरिक प्रेरणा से निर्णय लेते हैं,

    किसी काम के लिए सही आंतरिक प्रेरणा खुद से खुद के लिए बहुत बड़ा पुरस्कार है।

    परस्थिति समझ न आये तो …

    पानी को कसकर पकड़ोगे तो वो हाथ से छुट जायेगा,
    उसे बहेने दो वो अपना रास्ता खुद बना लेगा,
    कभी कभी जब परिस्थितिया समज में ना आये तो,
    जो कुछ जीवन में घटित हो रहा है उसे शांत भाव व
    तटस्थ होकर बस देखना चाहिए,
    समय आने पर जीवन अपना मार्ग खुद बना लेगा !!

    Conditioning

    किसी चीज का आदी बन जाना एक psychological process है।  हमारे अधिकतर व्यहार ,चीजो या माहौल या लगातार कुछ चीजो के अभ्यस्त रहना आदी  बनते रहते हैं। इसलिये हमे खुद को अच्छी चीजों का आदी बनाना चाहिये।

    यादि हम कोई सही चीज सही ढ़ंग से करना चाहें तो वास्तव में उसे सही ढ़ंग से नही कर पाएंगे,इसका  मतलब यह हुआ की हमे उसकी आदत बनानी पड़ेगी।

    आदत एक बहुत ही मुश्किल शब्द है, इसका छोड़ना और भी मुश्किल है, एक बार सही और गलत चीज़ की आदत पड़ जाता है तो उसका छुटकारा बहुत ही मुश्किल है, इसलिये अपने आप में अच्छी आदतें डालना बहुत जरूरी है,

    अच्छी आदतों को अपनाना मुश्किल है, लेकिन उनके साथ जीना आसान है, बुरी आदतों को अपनाना आसान है मगर उनके साथ जीना मुश्किल है।

    whi to khushi thi..

    Khuli khidki se aasman ko nihara ambar nila tha,pili si thi roshni,   sabkuch wahi tha Jo kal tha badla tha kuchh to WO chehre ki noor thi,   kuchh alag se Jo chamak rahi thi WO thi aankho ki roshni,

     Sab kuch wahi tha wahi dharti wahi aasmaa, wahi pilli roshni, par kuchh badla tha to WO pal tha, sayd usme ek kal tha,          

    Ek pal ne dheere se aake mere kano me ek baat khi thi, us pal ke sath dher sari umange Judi thi, jisne badal diya tha ek hi pal me sabkuch, lagne LGA tha nya har kuchh who to khushi thi,are whi to khushi thi Jo mere adhro pe fashi thi……